विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर दिए तनावमुक्त रहने का मंत्र, आर्ट ऑफ लिविंग ने कराया विशेष ध्यान सत्र

देहरादून। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, काम का बढ़ता दबाव और लगातार बदलती परिस्थितियां मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में मन को शांत रखना, तनाव से निपटना और भावनात्मक संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आर्ट ऑफ लिविंग ने मीडिया कर्मियों के लिए एक घंटे का विशेष ध्यान एवं मानसिक स्वास्थ्य सत्र आयोजित किया। कार्यक्रम में पत्रकारों को ध्यान, प्राणायाम और श्वास तकनीकों के माध्यम से तनाव कम करने तथा सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के व्यावहारिक तरीके बताए गए।

प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में आर्ट ऑफ लिविंग के उत्तराखंड प्रभारी नितिन जैन ने गुरुदेव श्री श्री रविशंकर का संदेश साझा करते हुए मानसिक स्वास्थ्य को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि ध्यान आज के समय में न तो फैशन है और न ही विलासिता, बल्कि जीवन की आवश्यकता है। सूचनाओं की अधिकता, पेशेवर जिम्मेदारियां, अकेलापन और निरंतर तनाव व्यक्ति की मानसिक शांति को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में कुछ समय स्वयं के लिए निकालना और मन को विश्राम देना आवश्यक है। नियमित ध्यान व्यक्ति को अधिक शांत, सजग, एकाग्र और भावनात्मक रूप से संतुलित बनाने में सहायक हो सकता है। उन्होंने प्रतिदिन सुबह और शाम 15 से 20 मिनट ध्यान करने की आवश्यकता पर बल देते हुए शरीर की स्वच्छता की तरह मन की शांति और स्वच्छता का ध्यान रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मजबूत मन कमजोर शरीर को भी संभाल सकता है। यह संदेश मानसिक मजबूती, आत्मबल और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता के महत्व को रेखांकित करता है।

ध्यान और प्राणायाम का व्यावहारिक अभ्यास

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित मीडिया कर्मियों को प्राणायाम, अनुलोम-विलोम और विभिन्न श्वास प्रक्रियाओं के साथ ध्यान का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि व्यस्त कार्यशैली के बीच भी नियमित रूप से कुछ मिनट ध्यान के लिए निकालकर मानसिक शांति और एकाग्रता की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है। सत्र में इस बात पर भी जोर दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव परिवार, कार्यस्थल और समाज पर भी पड़ता है। सामूहिक ध्यान को समाज में शांति, सद्भाव और सकारात्मकता की भावना को प्रोत्साहित करने का एक माध्यम बताया गया।

विशेष शिविर आयोजित करने की पहल

कार्यक्रम के समापन पर आर्ट ऑफ लिविंग ने मीडिया कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण के लिए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता जताई। साथ ही पत्रकारों के लिए सुदर्शन क्रिया एवं अन्य तनावमुक्ति कार्यक्रमों के विशेष शिविर आयोजित करने की दिशा में पहल करने की बात कही गई।

इस अवसर पर आर्ट ऑफ लिविंग के मीडिया कोऑर्डिनेटर संजय भार्गव, स्टेट कोऑर्डिनेटर नंदिता सिंह तथा स्टेट एपेक्स सदस्य आनंद कंसल, ललित मोहन और ऋषभ कोहली सहित संस्था के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

 

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