4600 ग्रेड पे की मांग को लेकर देहरादून में उमड़ा जनसैलाब, पुलिस अधिकार मार्च में सरकार से जल्द निर्णय की मांग

देहरादून। उत्तराखंड पुलिस के जवानों की 4600 ग्रेड पे की मांग को लेकर सोमवार को राजधानी देहरादून में “पुलिस अधिकार मार्च” निकाला गया। परेड मैदान से शुरू हुआ यह मार्च पुलिस मुख्यालय की ओर बढ़ा, जिसमें पुलिस परिवारों के साथ ही विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की।

मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार से वर्ष 2001 और 2002 बैच के पुलिस कांस्टेबलों को 4600 ग्रेड पे का लाभ देने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद पुलिस जवान अपने हक से वंचित हैं। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी मांग पूरी नहीं होने से पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों में नाराजगी है। पुलिस अधिकार मार्च को देखते हुए पुलिस मुख्यालय से पहले ही बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। प्रदर्शनकारियों को बैरिकेडिंग पर रोक दिया गया, जिसके बाद वे काफी देर तक वहीं धरने पर बैठे रहे। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लिया। इस दौरान एडवोकेट संदीप चमोली ने कहा कि पुलिस जवान दिन-रात प्रदेश की सुरक्षा, कानून व्यवस्था और जनसेवा में जुटे रहते हैं। ऐसे में उनकी 4600 ग्रेड पे की मांग पर सरकार को शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।सुराज सेवा दल के अध्यक्ष रमेश चंद्र जोशी ने कहा कि पुलिस कर्मियों की यह मांग न्यायसंगत है और सरकार को संवेदनशीलता के साथ इस पर फैसला लेना चाहिए। वहीं राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के अध्यक्ष शिव प्रसाद सेमवाल ने कहा कि 4600 ग्रेड पे पुलिस जवानों का अधिकार है, इसे किसी तरह का उपकार नहीं माना जाना चाहिए। मार्च को कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा, उत्तराखंड क्रांति दल, बेरोजगार संगठन, मूल निवास-भू कानून संघर्ष समिति, जन अधिकार मंच समेत कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने समर्थन दिया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा और आगामी चरण में मुख्यमंत्री आवास घेराव की रणनीति तैयार की जाएगी। वहीं आयोजकों ने मार्च को सफल बनाने में सहयोग देने वाले पुलिस परिवारों, सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों, युवाओं, नागरिकों और मीडिया प्रतिनिधियों का आभार जताया।

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