खूबसूरत गलियारा: प्रकृति और विकास की अनोखी मिसाल

देहरादून। शिवालिक की घने जंगलों के बीच, जहां राजाजी टाइगर रिजर्व की हरियाली दिल को छूती है, वहां एक खास तोहफा तैयार हुआ है। दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे का 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर — एशिया का सबसे लंबा ऐसा गलियारा, जो हर किसी को प्यारा लगता है।
कभी घने वनों से होकर गुजरने वाली पुरानी सड़क पर हाथी, तेंदुआ, नीलगाय और सांभर अक्सर वाहनों की चपेट में आ जाते थे। स्थानीय लोग बंदरों को भोजन खिलाते तो दुर्घटनाएं आम हो जातीं। लेकिन अब बदलाव आया है। गणेशपुर से मोहंड होते हुए आशारोड़ी (देहरादून) तक फैला यह कॉरिडोर तीन जोनों में बंटा है। औसतन 6-7 मीटर ऊंचाई पर बनी यह एलिवेटेड सड़क नीचे जंगल की जमीन को पूरी तरह वन्य जीवों के लिए छोड़ देती है।
भारतीय वन्य जीव संस्थान (WII) और NHAI की हालिया स्टडी में कैमरा ट्रैप्स ने चमत्कार दर्ज किया। 18 प्रजातियों के 40,000 से ज्यादा फोटो आए — हाथियों ने कम से कम 60 बार इस गलियारे का इस्तेमाल किया। तेंदुआ, सांभर, चीतल, जंगली सूअर, गोल्डन जैकल और यहां तक कि पक्षी भी बेरोक-टोक घूम रहे हैं। ध्वनि और वायु प्रदूषण कम करने के खास डिजाइन ने वन्य जीवों को नई स्वतंत्रता दी है।
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खूबी है — कोई मानव विस्थापन नहीं। नदी बेड और वन क्षेत्र पर ऊंचा मार्ग बनाकर गांवों को बचाया गया। अगले 20 वर्षों में 2.44 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा, जो करीब 65 लाख पेड़ों के बराबर है। साथ ही 19 प्रतिशत ईंधन की बचत होगी।
आज जब प्रधानमंत्री इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर रहे हैं, तो दिल्ली से देहरादून का सफर सिर्फ 2.5 घंटे का रह जाएगा। यात्री ऊपर से तेज रफ्तार से गुजरेंगे, जबकि नीचे जंगल के राजा बेखौफ विचरण करेंगे।
यह कॉरिडोर सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि विकास और प्रकृति के बीच प्यार का पुल है — जहां इंसान की गति और वन्य जीवों की आजादी साथ-साथ चलती है। एक अनोखी स्टोरी, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी।

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