देहरादून। विरासत महोत्सव-2026 की सांस्कृतिक संध्या संगीत, नृत्य और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक विविधता के नाम रही। हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला में आयोजित कार्यक्रम में 20 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने गायन प्रतिभा का प्रदर्शन किया। वहीं, छह देशों के कलाकारों की नृत्य प्रस्तुतियों और प्रख्यात बांसुरी वादक अश्विन श्रीनिवासन तथा गायिका प्रियंका बर्वे की सुरीली प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विरासत साधना के तहत आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने शास्त्रीय और पारंपरिक गायन की प्रस्तुतियां दीं। तबले, हारमोनियम और तानपुरे की संगत ने प्रस्तुतियों में मधुरता घोली। सरस्वती संगीत मंदिर, वेल्हम बॉयज स्कूल, द टोंस ब्रिज स्कूल, होपटाउन गर्ल्स स्कूल, ग्राफिक एरा सहित 20 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साह से भाग लिया। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के विद्यालय लतिका के विद्यार्थियों की सहभागिता भी आकर्षण का केंद्र रही।
छह देशों की संस्कृति का संगम
महोत्सव में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के सहयोग से कजाकिस्तान, बांग्लादेश, मिस्र, उज्बेकिस्तान, वेनेजुएला और नाइजीरिया के कलाकारों ने ‘मुक्ति कंट्री ट्रूप’ के माध्यम से अपनी पारंपरिक नृत्य शैलियों का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के समापन पर भारतीय शास्त्रीय नृत्य और ‘शक्ति’ प्रस्तुति ने ऊर्जा, सामर्थ्य और एकता का संदेश दिया।
अश्विन की बांसुरी ने बिखेरे सुर
बांसुरी वादक अश्विन श्रीनिवासन ने राग पूरिया धनाश्री के विलंबित खयाल और राग बिहाग की प्रस्तुति से शास्त्रीय संगीत की गहराई को सामने रखा। इसके बाद गजलों ने संध्या को नया रंग दिया। तबले पर अभिषेक मिश्रा और बांसुरी पर हिमांशु कानेकर ने संगत की।
प्रियंका बर्वे के गीत-गजलों पर झूमे श्रोता
गायिका प्रियंका बर्वे ने ‘केसरिया बालम’, ‘लग जा गले’, ‘छाप तिलक’ और ‘आज जाने की जिद न करो’ जैसी लोकप्रिय रचनाओं से समां बांधा। उन्होंने बेगम अख्तर, फरीदा खानम, मेहदी हसन और लता मंगेशकर की सांगीतिक विरासत को अपनी आवाज में जीवंत किया। कलाकारों की सुरमयी प्रस्तुतियों ने महोत्सव की शाम को यादगार बना दिया।