देहरादून। महिला सशक्तीकरण अब केवल अधिकारों तक सीमित नहीं, बल्कि नेतृत्व, निर्णय क्षमता और राष्ट्र निर्माण में बराबर की भागीदारी का विषय है। बेटियों की इसी शक्ति और सामर्थ्य को मंच देने के उद्देश्य से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) देहरादून महानगर की ओर से युवती सम्मेलन ‘शक्ति संगम’ आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों की छात्राओं ने प्रतिभाग कर महिला अधिकारों, सामाजिक चुनौतियों और देश के विकास में युवतियों की भूमिका पर विचार साझा किए।
दून मेडिकल कालेज के सभागार में आयोजित सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि आज की नारी केवल समाज की सहभागी नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता है। युवतियों को शिक्षा के साथ स्वास्थ्य, आत्मरक्षा, मानसिक मजबूती और सामाजिक सुरक्षा के प्रति भी जागरूक होना होगा। एक शिक्षित और सशक्त युवती न केवल अपना भविष्य संवारती है, बल्कि पूरे परिवार और समाज को दिशा देने की क्षमता रखती है। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ की पूर्व महासचिव एवं विशिष्ट अतिथि दीप्ति रावत भारद्वाज ने छात्र राजनीति और सामाजिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि छात्राओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया और नीति निर्माण में आगे आना चाहिए। लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए बेटियों का मुखर और वैचारिक रूप से सजग होना जरूरी है। एबीवीपी की पूर्व प्रदेश मंत्री डॉ. भावना डोभाल ने कहा कि छात्राओं को आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन बनाते हुए सामाजिक कुरीतियों और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठानी होगी। वहीं, एबीवीपी उत्तर-पश्चिम क्षेत्र की क्षेत्रीय छात्रा प्रमुख डॉ. प्रिया शर्मा ने कहा कि ‘शक्ति संगम’ महज एक सम्मेलन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में बेटियों की असीम ऊर्जा और सामर्थ्य को जोड़ने का अभियान है। स्वावलंबी, जागरूक और राष्ट्र के प्रति समर्पित युवतियां ही विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
सम्मेलन के विभिन्न संवाद सत्रों में छात्राओं ने भी सामाजिक विषयों और राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी को लेकर विचार रखे। वंदेमातरम के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।