देहरादून। उत्तराखंड में सगंध एवं औषधीय फसलों के क्षेत्र में नई संभावनाओं को तलाशने और किसानों को वैकल्पिक खेती से जोड़ने के उद्देश्य से सेलाकुई स्थित परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान एवं विकास संस्थान में दालचीनी पर केंद्रित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार दालचीनी जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देकर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां सगंध एवं औषधीय पौधों की खेती के लिए अनुकूल हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ‘महक क्रांति नीति-2026’ लागू की है, जिसके माध्यम से हजारों किसानों को सगंध खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। कृषि मंत्री ने बताया कि चम्पावत और नैनीताल जिलों में बड़े स्तर पर “सिनेमन वैली” विकसित की जा रही है। करीब 5200 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित इस परियोजना से दालचीनी उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि दालचीनी की खेती किसानों के लिए पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक लाभकारी साबित हो सकती है। सेमिनार का विषय “दालचीनी: प्रवर्धन, सतत खेती एवं कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी में नवाचार” रखा गया है। इसमें श्रीलंका, इंडोनेशिया समेत कई देशों के विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और उद्योग प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान दालचीनी और अन्य औषधीय पौधों की उन्नत खेती, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
इस अवसर पर कृषि मंत्री ने देश-विदेश से आए विशेषज्ञों को सम्मानित किया तथा औषधीय एवं सगंध उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम में राज्य औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रताप सिंह पंवार, जड़ी-बूटी सलाहकार समिति की उपाध्यक्ष सोना सजवाण, कृषि सचिव डॉ. सुरेन्द्र नारायण पाण्डे, अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव, निदेशक सगंध पौधा केंद्र डॉ. नृपेन्द्र चौहान सहित अनेक अधिकारी, वैज्ञानिक और किसान मौजूद रहे।
