त्योहारी सीजन में बढ़ेगी कारोबारियों की स्टोरेज क्षमता, वी-लॉजिस ने शुरू किया ‘पे-पर-यूज़’ मॉडल

देहरादून। त्योहारी सीजन में बढ़ने वाली मांग और इन्वेंट्री के दबाव को देखते हुए वी-ट्रांस समूह की 3PL समाधान शाखा वी-लॉजिस ने कारोबारियों के लिमए लचीला ‘पे-पर-यूज़’ वेयरहाउसिंग मॉडल पेश किया है। इसके तहत कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार अतिरिक्त वेयरहाउस स्पेस ले सकेंगी और जितनी जगह का इस्तेमाल करेंगी, उसी के मुताबिक भुगतान कर सकेंगी।

त्योहारी सीजन में ई-कॉमर्स, रिटेल, एफएमसीजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और लाइफस्टाइल उत्पादों की मांग में तेजी आती है। ऐसे में कारोबारियों के सामने अचानक बढ़ने वाली इन्वेंट्री के लिए अतिरिक्त भंडारण क्षमता जुटाने की चुनौती रहती है। वहीं पूरे साल अतिरिक्त वेयरहाउस स्पेस बनाए रखना कंपनियों के लिए लागत बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। वी-लॉजिस का नया मॉडल इसी अंतर को कम करने पर केंद्रित है। कंपनी के अनुसार व्यवसाय अब पीक सीजन में अपनी स्टोरेज क्षमता को मांग के अनुरूप बढ़ा या घटा सकेंगे। इसके लिए उन्हें नए वेयरहाउस में निवेश करने या लंबे समय के लिए अतिरिक्त जगह लेने की जरूरत नहीं होगी। यह सुविधा मौसमी इन्वेंट्री, त्योहारी मांग, नए उत्पादों की लॉन्चिंग, क्षेत्रीय विस्तार और अन्य अल्पकालिक जरूरतों के लिए भी इस्तेमाल की जा सकेगी।

वी-ट्रांस के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एवं वी-लॉजिस के सीईओ रोनक शाह ने कहा कि त्योहारी सीजन सप्लाई चेन के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण दौरों में से एक होता है। ऐसे में ‘पे-पर-यूज़’ मॉडल कारोबारियों को बिना लंबी अवधि की प्रतिबद्धता के जरूरत के मुताबिक वेयरहाउस क्षमता बढ़ाने और घटाने की सुविधा देगा।

टियर-2 और टियर-3 शहरों से बढ़ी मांग

कंपनी ने 2025 के त्योहारी सीजन का उदाहरण देते हुए बताया कि फ्लिपकार्ट ने त्योहारी अवधि में संभाली गई यूनिट्स में सालाना आधार पर 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की थी। पीक दिनों में प्रति मिनट 5,000 से अधिक शिपमेंट मूव हुए और एक दिन में 73 लाख से अधिक शिपमेंट पूरे किए गए। कंपनी के मुताबिक 60 प्रतिशत से अधिक ऑर्डर टियर-2 और टियर-3 क्षेत्रों से आए।

वी-लॉजिस के समाधान में पे-पर-यूज़ और पे-पर-स्पेस मॉडल, अल्प एवं दीर्घकालिक विकल्प, ऑन-डिमांड स्टोरेज, जरूरत के अनुसार स्केलेबल स्पेस और देशभर में वेयरहाउसिंग सुविधाओं तक पहुंच शामिल है। इससे कंपनियों को पीक सीजन की जरूरत के अनुसार भंडारण व्यवस्था करने में अधिक लचीलापन मिलेगा।

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