देहरादून। बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला अब प्रशासनिक जांच से आगे बढ़कर राजनीतिक और सामाजिक बहस का मुद्दा बन गया है। जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए अब स्वतंत्र न्यायिक निगरानी की मांग जोर पकड़ रही है।
देहरादून प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान Bhairav Sena के अध्यक्ष संदीप खत्री ने दावा किया कि मामले से जुड़े अहम सबूत सीसीटीवी फुटेज में मौजूद हैं, जो कथित अनियमितताओं की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने कहा कि Badrinath-Kedarnath Temple Committee (बीकेटीसी) द्वारा गठित जांच समिति की संरचना पर गंभीर सवाल उठते हैं। खत्री के अनुसार, समिति में साइबर या डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञों की अनुपस्थिति जांच की तकनीकी विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि पूरा मामला डिजिटल साक्ष्यों पर आधारित बताया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि समिति में शामिल अधिकतर सदस्य मंदिर प्रशासन से जुड़े हैं, जिससे निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है। इस कारण उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराए जाने की मांग की।
वहीं राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा तेजी से गर्माता जा रहा है। Ganesh Godiyal ने कहा कि जिन विभागों या लोगों पर आरोप हैं, उन्हीं से जुड़े व्यक्तियों को जांच प्रक्रिया में शामिल करना पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है।गोदियाल ने मांग की कि पूरे मामले की जांच विधानसभा की संयुक्त समिति (जेपीसी) के माध्यम से कराई जाए, जिसकी अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष करें, ताकि जांच प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बना रहे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि सरकार इस विकल्प पर आगे नहीं बढ़ती है, तो उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही कांग्रेस ने मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को इस मामले में स्पष्ट और निष्पक्ष रुख अपनाना चाहिए था। कांग्रेस का कहना है कि जांच समिति की वर्तमान संरचना से उसकी विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।पार्टी ने दोहराया कि वह स्वतंत्र और न्यायिक निगरानी में जांच की अपनी मांग पर कायम है और किसी भी पक्षपातपूर्ण निष्कर्ष को स्वीकार नहीं करेगी।