इक्फाई विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समारोह में 517 विद्यार्थियों को मिली डिग्रियां

– 13 विद्यार्थियों को गोल्ड, 15 को सिल्वर और 14 को ब्रॉन्ज मेडल; छह शोधार्थियों को पीएचडी

देहरादून। सेलाकुई स्थित इक्फाई विश्वविद्यालय देहरादून का 13वां दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया गया। समारोह में विभिन्न संकायों के कुल 517 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जबकि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 13 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल, 15 को सिल्वर मेडल और 14 विद्यार्थियों को ब्रॉन्ज मेडल से सम्मानित किया गया। इसके अलावा छह शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।

इक्फाई बिजनेस स्कूल के अंतर्गत एमबीए के 95, बीबीए के 14, बीबीए (एफआईए) के आठ, बीकॉम के 23 और बीए इकोनॉमिक्स के दो विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इक्फाई टेक स्कूल से बीटेक के 15, बीसीए के 68, बीएससी (डेटा साइंस) के 10 तथा डिप्लोमा इन सिविल इंजीनियरिंग के चार विद्यार्थियों को डिग्रियां मिलीं। इक्फाई लॉ स्कूल के अंतर्गत एलएलएम के 28, एलएलबी के 32, बीबीए एलएलबी के 39 और बीए एलएलबी के 95 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। शिक्षा संकाय से बीएड के 84 विद्यार्थियों को डिग्रियां दी गईं। वहीं, छह शोधार्थियों—डॉ. ज्ञानेंद्र त्रिपाठी, डॉ. श्रीकांत पथूरी, डॉ. प्रिया चनाना, डॉ. आयुषी मित्तल, डॉ. आत्म प्रकाश राय और डॉ. सीमा शर्मा—को पीएचडी की उपाधि से अलंकृत किया गया।

समारोह का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) राम करण सिंह ने किया। उन्होंने उत्तराखंड के राज्यपाल, उच्च शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। कुलपति ने विश्वविद्यालय की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि संस्थान अनुसंधान के क्षेत्र में निरंतर नए आयाम स्थापित कर रहा है। वर्तमान में विश्वविद्यालय में 139 पीएचडी शोधार्थी अध्ययनरत हैं। उन्होंने बताया कि शोध और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय ने आईआईटी रुड़की और आईआईटी मंडी के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। अपने संबोधन में कुलपति ने ‘सा विद्या या विमुक्तये’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान वही है जो व्यक्ति को मुक्त करे। शिक्षा और ज्ञान विद्यार्थियों के लिए जीवन में आगे बढ़ने के नए अवसरों के द्वार खोलते हैं।

विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट डॉ. उदय बी. देसाई ने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय से हमेशा जुड़े रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दुनिया का कोई भी विश्वविद्यालय अपने एलुमनाई यानी पूर्व छात्रों के बिना अपनी पहचान नहीं बना सकता। समारोह के मुख्य अतिथि टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी एवं आईआईटी तिरुपति के प्रोफेसर प्रो. राघवन मुरली धरन नैयर रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि ज्ञान के साथ चिंतन भी बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज प्राप्त हुई डिग्री चिंतन करने और जीवन में लगातार सीखते रहने का लाइसेंस है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. डॉ. संजीव मालवीय ने भी डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धि पर बधाई दी। समारोह में प्रो. रमेश चंद रमोला सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रोफेसर, शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

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