देहरादून। हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला में आयोजित विरासत महोत्सव-2026 की 14वीं सांस्कृतिक संध्या भारतीय शास्त्रीय संगीत, अंतरराष्ट्रीय सुरों और लोक संस्कृति के नाम रही। हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक अनोल चटर्जी की सुरीली प्रस्तुति और सैक्सोफोन वादक जॉर्ज ब्रूक्स तथा वायलिन वादक कला रामनाथ की शानदार जुगलबंदी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, राजस्थान के लांगा समूह के कालबेलिया नृत्य ने लोक संस्कृति के रंग बिखेरे।
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत राजस्थान के प्रसिद्ध कालबेलिया लोकनृत्य से हुई। बाड़मेर के लांगा समूह की कलाकार गीता, मनीषा और निशा ने अपनी आकर्षक नृत्य शैली और भावपूर्ण अभिव्यक्तियों से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। हारमोनियम पर जाकिर खान, सारंगी पर दूड़े खान, ढोलक पर शौकत खान और खड़ताल पर इरफान हुसैन सहित अन्य कलाकारों ने शानदार संगत की।
इसके बाद हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक अनोल चटर्जी ने राग यमन से अपनी प्रस्तुति का आगाज किया। ठुमरी, दादरा और भजनों के माध्यम से उन्होंने शास्त्रीय संगीत की मिठास घोली। तबले पर शुभ महाराज, हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्रा और तानपुरे पर सिद्धांत प्रुथी ने संगत की। पद्मभूषण पंडित अजय चक्रवर्ती के शिष्य अनोल चटर्जी की प्रस्तुति में सुरों की गहराई और शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा देखने को मिली।
संध्या का विशेष आकर्षण ‘एन इवनिंग ऑफ कॉन्फ्लुएंस’ रहा। इसमें जॉर्ज ब्रूक्स ने सैक्सोफोन और कला रामनाथ ने वायलिन पर भारतीय शास्त्रीय संगीत तथा जैज का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। प्रस्तुति की शुरुआत काफी ठाट पर आधारित रचना से हुई और समापन राग भैरवी के साथ किया गया। तबले पर शुभ महाराज की संगत ने इस जुगलबंदी को और प्रभावशाली बना दिया।
महोत्सव के 14 दिनों में संगीत प्रेमियों के साथ खरीदारी और खानपान के शौकीनों की भी खूब भीड़ उमड़ी। फूड कोर्ट में गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों के व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए लोग पहुंचते रहे। हस्तशिल्प, फर्नीचर और सजावटी वस्तुओं के स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र बने रहे।