– हिमालयन फूड फेस्ट में छात्रों ने परोसे पारंपरिक व्यंजन, बुरांश-माल्टा के मॉकटेल्स ने बढ़ाई महफिल की रंगत
देहरादून। हिमालय की वादियों में रचे-बसे पारंपरिक स्वाद शुक्रवार को ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में जीवंत हो उठे। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर आयोजित हिमालयन फूड फेस्ट में छात्र-छात्राओं ने गढ़वाली और नेपाली थाली के साथ हिमालयी क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजनों को आधुनिक और आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत कर लोगों को पहाड़ों के स्वाद से रूबरू कराया।
फूड फेस्ट में पहाड़ी खान-पान की खुशबू और पारंपरिक जायकों ने माहौल को खास बना दिया। छात्र-छात्राओं ने न केवल विभिन्न व्यंजन तैयार किए, बल्कि उनकी प्रस्तुति में भी स्थानीय संस्कृति और पाक परंपराओं की झलक दिखाई।गढ़वाली थाली में दाल की पकौड़ी, भांग की चटनी, स्वाले, फाणु, आलू के गुटके, कुमाऊंनी रायता और झंगोरे की खीर ने पहाड़ी खान-पान की समृद्ध परंपरा को सामने रखा। वहीं, नेपाली थाली में सेल रोटी, गुरखाली चटनी और मोमो के जरिए नेपाल के पारंपरिक स्वाद और खान-पान की विविधता प्रस्तुत की गई। फेस्ट की खास आकर्षण हिमालयन मॉकटेल्स रहे। विद्यार्थियों ने पहाड़ों में पाए जाने वाले बुरांश और माल्टा जैसे फलों का इस्तेमाल कर पारंपरिक स्वाद को नए और रचनात्मक अंदाज में पेश किया। इन अनूठे स्वादों ने फेस्ट में आने वाले लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
इस आयोजन की खास बात यह रही कि फूड फेस्ट में तैयार किए गए सभी व्यंजनों के पीछे विद्यार्थियों की मेहनत और प्रशिक्षण की झलक दिखाई दी। ये व्यंजन कौशल ज्योति योजना के तहत होटल मैनेजमेंट का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे छात्र-छात्राओं ने तैयार किए। इस योजना के माध्यम से उत्तराखंड के गरीब परिवारों के बच्चों को निशुल्क होटल मैनेजमेंट प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे उन्हें रोजगार और बेहतर भविष्य के अवसर मिल सकें। हिमालयन फूड फेस्ट का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट की ओर से किया गया। विभागाध्यक्ष डा. अमर डबराल के साथ विभाग के शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं कार्यक्रम में शामिल रहे। फूड फेस्ट ने हिमालयी खान-पान को नई पीढ़ी की रचनात्मकता से जोड़ते हुए यह संदेश दिया कि पारंपरिक व्यंजन केवल स्वाद की विरासत नहीं, बल्कि क्षेत्र की संस्कृति, पहचान और पर्यटन को दुनिया तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम भी हैं।