देहरादून। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूकेपीसीबी) द्वारा ‘फ्री स्माइल फाउंडेशन’ के संयुक्त तत्वावधान में ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 एवं बल्क वेस्ट जनरेटर्स के लिए अनुपालन तंत्र’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने पर जोर दिया गया।
बोर्ड के मुख्य कार्यालय स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य पर्यावरण अभियंता पी. के. जोशी ने किया। उन्होंने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन और उनके पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डाला। प्रथम तकनीकी सत्र में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), नई दिल्ली के वैज्ञानिक ‘एफ’ एवं निदेशक अनिल सी. रानवेकर ने ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026’ के कानूनी एवं तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने होटल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, शैक्षणिक संस्थान एवं बड़ी आवासीय सोसायटियों जैसे बल्क वेस्ट जनरेटर्स के लिए नियमों के अनुपालन को अनिवार्य बताया। इसके बाद प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया। द्वितीय तकनीकी सत्र में आईआईटी रुड़की (सहारनपुर परिसर) के प्रो. कीर्तिराज के. गायकवाड़ ने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन एवं आधुनिक रीसाइक्लिंग तकनीकों पर व्याख्यान दिया। उन्होंने प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए नवाचार आधारित समाधान अपनाने पर बल दिया। कार्यशाला में स्रोत पर ही कचरे के पृथक्करण पर विशेष जोर दिया गया, जिसके तहत गीला कचरा (हरा डस्टबिन), सूखा कचरा (नीला डस्टबिन), सेनेटरी कचरा (लाल डस्टबिन) एवं विशेष देखभाल/ई-वेस्ट (काला डस्टबिन) के माध्यम से वैज्ञानिक निस्तारण की प्रक्रिया को समझाया गया।
कार्यक्रम का कुशल संचालन (Moderation) एडवोकेट पार्थ उपाध्याय द्वारा किया गया, जिन्होंने उपस्थित अतिथियों का परिचय कराया और सत्र की रूपरेखा प्रस्तुत की। समापन अवसर पर पर्यावरण अभियंता अनिल पोखरियाल ने सभी विशेषज्ञों, प्रतिभागियों एवं फ्री स्माइल फाउंडेशन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला स्वच्छ एवं हरित उत्तराखंड की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिकारी, विशेषज्ञ एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।