बदरी-केदार में आस्था का रिकॉर्ड, 32 लाख पार श्रद्धालु, अब दूसरे चरण की यात्रा पर बीकेटीसी का फोकस 

– 76 करोड़ से अधिक की आय

– चढ़ावे की गणना तक व्यवस्था होगी और पारदर्शी 

ऋषिकेश। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा ने इस वर्ष आस्था और श्रद्धालुओं की संख्या के लिहाज से नया रिकॉर्ड बनाया है। श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ धाम में अब तक 32 लाख से अधिक तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। दोनों धामों से श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) को 76 करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई है। खास बात यह है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अब तक करीब 20 प्रतिशत अधिक श्रद्धालु चारधाम पहुंचे हैं, जबकि यात्रा के कपाट बंद होने में अभी करीब दो माह शेष हैं।

शनिवार को ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कैंप कार्यालय सभागार में बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की अध्यक्षता में हुई बोर्ड बैठक में रिकॉर्ड यात्रा को लेकर सरकार और मंदिर समिति की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। समिति ने पहले चरण की यात्रा को सफल बनाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का आभार जताया। अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि सरकार के दिशा-निर्देशों और बीकेटीसी की व्यवस्थाओं के चलते वर्ष 2026 की यात्रा ऐतिहासिक रही है। अब दूसरे चरण की यात्रा को और बेहतर बनाने पर पूरा फोकस किया जा रहा है। बीकेटीसी के अनुसार अब तक 17,22,908 श्रद्धालु बदरीनाथ और 14,92,047 श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंच चुके हैं। वहीं हेमकुंड साहिब समेत चारधाम में दर्शन करने वाले यात्रियों की संख्या 50 लाख पार कर चुकी है। चारधाम यात्रा के लिए 60 लाख से अधिक पंजीकरण भी हो चुके हैं।

दूसरे चरण में व्यवस्थाएं होंगी और पुख्ता

बोर्ड बैठक में दूसरे चरण की यात्रा को लेकर व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। धामों और अधीनस्थ मंदिरों में सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने तथा चढ़ावे की गणना प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया गया। बीकेटीसी की वेबसाइट का आधुनिकीकरण और यात्रा की मानक संचालन प्रक्रिया को बेहतर करने पर भी सहमति बनी। बैठक में ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ के जीर्णोद्धार के दूसरे चरण और तुंगनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। त्रिजुगीनारायण मंदिर को विवाह पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का फैसला भी लिया गया। गुप्तकाशी स्थित संस्कृत महाविद्यालय का नाम बीकेटीसी के दिवंगत सदस्य श्रीनिवास पोस्ती के नाम पर रखने पर भी सहमति बनी।

कर्मचारियों के मामलों पर भी फैसले

बोर्ड ने अस्थायी कर्मचारियों के स्थायीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, स्थायी कर्मचारियों की पदोन्नति और असमय दिवंगत अस्थायी कर्मचारियों को आर्थिक सहायता देने सहित कई प्रस्तावों पर चर्चा की। बिना स्थायी हुए अधिवर्षता आयु पूरी करने वाले कार्मिकों को एकमुश्त राशि देने पर भी विचार किया गया। इसके अलावा सीता माता मंदिर चांई के जीर्णोद्धार, हक-हकूकधारियों व दस्तूरधारियों के मामलों, भीड़ प्रबंधन के लिए विशेषज्ञों की सहायता तथा वेद-संस्कृत महाविद्यालय खोलने संबंधी प्रस्ताव भी पारित किए गए।

बैठक में बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, उपाध्यक्ष विजय कप्रवान सदस्य नीलम पुरी,राजपाल सिंह जड़धारी, महेन्द्र शर्मा दिनेश डोभाल, विनीत पोस्ती,प्रहलाद पुष्पवान, देवी प्रसाद दैवली,राजेन्द्र डिमरी, धीरज पंचभैया मोनू ,राकेश भण्डारी, कमला बगवाड़ी , जेपी सेमवाल, राजकुमार तिवारी, रजनीश भट्ट सहित मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़,वित्त नियंत्रक हेम कांडपाल,अधिशासी अभियंता विपिन तिवारी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी,  एसएस बर्त्वाल, नोडल अधिकारी राकेश सेमवाल, डा. हरीश गौड़, अतुल डिमरी, संजय भट्ट,विश्वनाथ दीपेंद्र रावत आदि मौजूद रहे।

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