पीएम मोदी ने सराहा उत्तराखंड का हुनर, छोलिया नृत्य से लेकर पहाड़ी उत्पादों तक दिखी देवभूमि की पहचान

देहरादून। गुजरात के एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में आयोजित ‘भारत पर्व-2026’ में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक हस्तशिल्प और पर्यटन की विविधता ने देशभर से पहुंचे लोगों का ध्यान आकर्षित किया। राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आयोजित इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न राज्यों के प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया। इस दौरान उत्तराखंड पर्यटन विभाग के स्टॉल पर पहुंचने पर उनका स्वागत कुमाऊं के प्रसिद्ध छोलिया नृत्य और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच किया गया।

पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने रणसिंघा और ढोल-दमाऊ की थाप पर छोलिया नृत्य की प्रस्तुति दी। उत्तराखंड की इस विशिष्ट लोकनृत्य शैली ने प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और पर्यटन विभाग की ओर से प्रस्तुत की गई राज्य की सांस्कृतिक एवं पर्यटन संबंधी झलकियों की सराहना की। उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने इस आयोजन के माध्यम से देवभूमि की धार्मिक विरासत के साथ साहसिक और ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया। स्टॉल पर चारधाम यात्रा, होमस्टे योजना, रिवर राफ्टिंग, ट्रेकिंग, पैराग्लाइडिंग और ‘ट्रेक ऑफ द ईयर’ जैसी पर्यटन गतिविधियों की जानकारी साहित्य और डिजिटल माध्यमों से दी गई। इसका उद्देश्य उत्तराखंड को धार्मिक पर्यटन के साथ साहसिक और प्रकृति आधारित पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रस्तुत करना रहा।

पहाड़ी उत्पादों और हस्तशिल्प ने खींचा ध्यान

स्टॉल पर उत्तराखंड के स्थानीय, जैविक और पारंपरिक उत्पाद भी आकर्षण का केंद्र रहे। राज्य के मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मडुआ और झंगोरे से बने बिस्कुट प्रदर्शित किए गए। इसके अलावा मुनस्यारी की राजमा, गहत-भट्ट की दालें, हिमालयी शहद और बुरांश का जूस भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे।

हस्तशिल्प की श्रेणी में उत्तराखंड की पारंपरिक ऐपण कला से सजे स्मृति चिह्न, दीवार सज्जा की वस्तुएं, अल्मोड़ा का ताम्र शिल्प और बदरी-केदार धाम की काष्ठ कला पर आधारित कलाकृतियां प्रदर्शित की गईं। वहीं, उच्च हिमालयी क्षेत्रों के भोटिया जनजातीय बुनकरों की ओर से तैयार ऊनी शॉल, कालीन और पंखियां भी प्रदर्शनी का हिस्सा रहीं।

पर्यटन विभाग के इस प्रदर्शन के जरिए उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय उत्पादों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक मंच पर प्रस्तुत किया गया। इससे प्रदेश के कारीगरों, बुनकरों और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के साथ उनके लिए नए बाजार की संभावनाएं भी सामने आईं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *