देहरादून। हिमालय की चोटियों पर सर्दियों और बर्फबारी की दस्तक के साथ ही उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध चारधाम और पंचकेदार में शीतकालीन प्रवास की तैयारियां तेज हो गई हैं। विजयदशमी पर घोषित शुभ मुहूर्त के अनुसार, छह नवंबर से धामों के कपाट बंद होने का सिलसिला शुरू होकर 16 नवंबर तक चलेगा। इसके साथ ही चारधाम यात्रा का समापन हो जाएगा और आराध्य देवताओं की उत्सव डोलियां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शीतकालीन गद्दीस्थलों के लिए रवाना होंगी। हालांकि, श्रद्धालु सर्दियों में भी निर्धारित स्थलों पर अपने आराध्य के दर्शन कर सकेंगे।
पंचकेदार में सबसे पहले छह नवंबर को तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट बंद होंगे। इसके बाद 10 नवंबर को गंगोत्री धाम और 11 नवंबर को केदारनाथ व यमुनोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर के कपाट 16 नवंबर को बंद होंगे। चारधाम के प्रमुख धाम बदरीनाथ मंदिर के कपाट भी 16 नवंबर को रात 9:37 बजे बंद होंगे। इसके साथ ही इस वर्ष की चारधाम यात्रा विधिवत संपन्न हो जाएगी।
शीतकालीन गद्दीस्थलों पर होंगे दर्शन
कपाट बंद होने के बाद बाबा केदार की उत्सव डोली ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचेगी, जहां शीतकाल में पूजा-अर्चना होगी। भगवान तुंगनाथ की डोली आठ नवंबर को मक्कूमठ पहुंचेगी, जबकि मदमहेश्वर की डोली 19 नवंबर को ऊखीमठ पहुंचेगी। गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर को दोपहर 12:05 बजे बंद होंगे। मां गंगा की उत्सव डोली मुखबा पहुंचेगी, जहां शीतकालीन पूजा होगी। वहीं, यमुनोत्री के कपाट 11 नवंबर को सुबह 10:28 बजे बंद होने के बाद मां यमुना की पूजा खरसाली में होगी। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद भगवान बदरीविशाल की पूजा जोशीमठ स्थित श्री नृसिंह मंदिर में होगी। इस तरह हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित मंदिरों के कपाट बंद होने के बावजूद उत्तराखंड की धार्मिक परंपराएं जारी रहेंगी। शीतकालीन प्रवास स्थल श्रद्धालुओं के लिए आस्था और दर्शन के प्रमुख केंद्र बने रहेंगे।