माया देवी विश्वविद्यालय के विशेष सिखाएंगे वैज्ञानिक खेती के गुर, सात गांवों को अपनाने की पहल

देहरादून। किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने और कृषि उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से माया देवी विश्वविद्यालय ने ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विस्तार गतिविधियों को बढ़ावा देने की पहल की है। विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी की ओर से विकासनगर तहसील के कोटी गांव में किसान-विद्यार्थी संवाद और शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को उन्नत बीज, मृदा स्वास्थ्य, सिंचाई प्रबंधन, फसल सुरक्षा और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की जानकारी दी। साथ ही दीर्घकालिक कृषि विकास के लिए सात गांवों को शामिल करते हुए कोटी ग्रामसभा को अपनाने का प्रस्ताव रखा गया।

विश्वविद्यालय की वाइस प्रेसिडेंट प्रो. (डॉ.) तृप्ति जुयाल सेमवाल ने कहा कि कृषि शिक्षा को कक्षाओं तक सीमित रखने के बजाय खेतों और ग्रामीण समुदायों से जोड़ना जरूरी है। इससे विद्यार्थियों को किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझने और अपने ज्ञान का उपयोग उनके समाधान में करने का अवसर मिलता है। कुलपति प्रो. (डॉ.) आशीष सेमवाल ने कहा कि किसानों के अनुभव और विशेषज्ञों के वैज्ञानिक मार्गदर्शन से कृषि उत्पादन में सुधार तथा स्थानीय समस्याओं का समाधान संभव है। विश्वविद्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित कोटी गांव की लगभग 90 प्रतिशत आबादी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। भ्रमण के दौरान बीएससी कृषि और बीएससी खाद्य प्रौद्योगिकी के विद्यार्थियों ने मक्का, धान, चना, सरसों, आलू, राजमा, हल्दी और विभिन्न सब्जियों की फसलों का अवलोकन किया। उन्होंने ग्रामीणों से संवाद कर खेती की चुनौतियों और कृषक परिवारों की परिस्थितियों को भी समझा। कृषि एवं प्रौद्योगिकी विद्यालय के डीन प्रो. महेंद्र सिंह पाल ने उन्नत फसल किस्मों, बीज की उचित मात्रा और समय पर सिंचाई की जानकारी दी। डॉ. साहिल ठाकुर ने मृदा स्वास्थ्य परीक्षण, डॉ. विनय ने गुणवत्तायुक्त बीज और बाजार तक पहुंच, जबकि डॉ. शुभम समकरिया ने बेहतर दुग्ध उत्पादन के लिए उन्नत डेयरी प्रबंधन के बारे में बताया।

संवाद में किसानों ने कीट एवं रोगों की पहचान, फसल सुरक्षा और प्राकृतिक व जैविक खेती के लिए तकनीकी सहायता की जरूरत बताई। विश्वविद्यालय ने कोटी, ढलानी, किनसाल, धारड़ा, मलेथा, द्वाथरा और कांडवाल गांवों में कृषि विस्तार गतिविधियां चलाने का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य किसानों तक वैज्ञानिक तकनीक पहुंचाना और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना है।

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