देवशाल-कोठेड़ा: 10 साल से सड़क का इंतजार, अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान 

– 2015 में हुई थी सड़क की घोषणा, 15 से 20 बार सर्वे के बाद भी निर्माण शुरू नहीं

– विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी

रुद्रप्रयाग। सड़क की घोषणा हुई, कई बार सर्वेक्षण किए गए, योजना भी बदली, लेकिन देवशाल-कोठेड़ा के ग्रामीणों को आज तक सड़क का इंतजार है। करीब एक दशक से सड़क की मांग कर रहे ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। शनिवार को सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने आंदोलन कर अपना आक्रोश जताया। उन्होंने शासन-प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि इस अवधि में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आगामी विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा। ग्रामीणों का आरोप है कि दो विभागों की खींचतान में गांव की सड़क फंसकर रह गई है और इसका खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

घोषणा से योजना तक पहुंची सड़क, धरातल पर काम अब भी अधूरा

ग्रामीणों के मुताबिक, वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत और क्षेत्रीय विधायक स्वर्गीय शैलारानी रावत ने गांव तक सड़क पहुंचाने की घोषणा की थी। इसके बाद ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि जल्द ही उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन समय बीतने के साथ यह उम्मीद इंतजार में बदलती चली गई। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर कई बार सर्वेक्षण हुए, मगर काम शुरू कराने की दिशा में ठोस पहल नहीं हो सकी।

लोनिवि और पीएमजीएसवाई के बीच उलझा मामला

ग्रामीणों के अनुसार, सड़क पहले लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) के अंतर्गत प्रस्तावित थी। वर्ष 2025 में इसे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत पारित किया गया। इसके बावजूद निर्माण की राह आसान नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। पीएमजीएसवाई की ओर से लोनिवि के कुछ कार्य अधूरे होने की बात कही जा रही है, जबकि लोनिवि का कहना है कि संबंधित कार्य पीएमजीएसवाई के दायरे में आते हैं। विभागीय असमंजस के चलते सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

15 से 20 बार सर्वे, फिर भी नहीं निकला रास्ता

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए अब तक 15 से 20 बार सर्वेक्षण किए जा चुके हैं। कभी वन स्वीकृति का मामला सामने आ जाता है तो कभी विभागीय समन्वय की कमी के कारण प्रक्रिया अटक जाती है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब सड़क निर्माण से जुड़ी बाधाओं का समाधान सरकारी विभागों को करना है, तो आपसी तालमेल से अब तक रास्ता क्यों नहीं निकाला गया? उनका कहना है कि बार-बार सर्वेक्षण और आश्वासनों से गांव की समस्या हल नहीं होगी, इसके लिए निर्माण कार्य शुरू करना जरूरी है।

15 दिन में कार्रवाई नहीं तो चुनाव बहिष्कार

लगातार इंतजार से नाराज ग्रामीणों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि वे सड़क के मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन से अगले 15 दिनों के भीतर सड़क निर्माण की बाधाएं दूर कर कार्य शुरू कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगामी विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे। आंदोलनकारियों का कहना है कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़ना क्षेत्र की गंभीर समस्या को दर्शाता है।

आंदोलन में ग्राम प्रधान शुभम देवशाली, नवयुवक मंगल दल अध्यक्ष अमित भट्ट, सतीश भट्ट, सत्यप्रकाश, कैलाश गोस्वामी, अंशुमान और अभिषेक सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की कि विभागीय विवाद का तत्काल समाधान कर देवशाल-कोठेड़ा को सड़क से जोड़ने की दिशा में काम शुरू कराया जाए।

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