– ‘द लिटरेरी टेबल’ लिटरेचर एंड आर्ट्स फेस्टिवल का भव्य आगा
देहरादून। साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और उसके भीतर मौजूद सवालों से रूबरू कराने का माध्यम भी है। इसी विचार के साथ देहरादून में दो दिवसीय ‘द लिटरेरी टेबल’ लिटरेचर एंड आर्ट्स फेस्टिवल का शनिवार को फेयरफील्ड बाय मैरियट के सभागार में दीप प्रज्वलन के साथ भव्य शुभारंभ हुआ। फेस्टिवल का उद्घाटन भारतीय रिजर्व बैंक, झारखंड के निदेशक प्रेम रंजन अनिमेष ने किया।
फेस्टिवल के पहले दिन साहित्य, कला, इतिहास, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर आठ सत्र आयोजित किए गए। देशभर से जुटे लेखकों, साहित्यकारों और बौद्धिक हस्तियों ने अलग-अलग विषयों पर विचार रखे। फेस्टिवल निदेशक डॉ. आलोका दास गुप्ता नियोगी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए साहित्य और कला की भूमिका पर प्रकाश डाला।
साइबर अपराध पर पूर्व डीजीपी की बेबाक बात
फेस्टिवल के दूसरे सत्र में उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार ने साइबर अपराध समेत विभिन्न अपराधों और पीड़ितों के प्रति पुलिस के रवैये पर अपनी बात रखी। उन्होंने अपराध की बदलती प्रकृति और पीड़ितों से जुड़े सवालों पर चर्चा की। सत्र के दौरान दर्शकों की ओर से पूछे गए सवालों पर भी उन्होंने जवाब दिए। तीसरे सत्र में जूही खन्ना, एस. समृद्धि गुलाटी और अजिताभा बोस ने भाग लिया। वहीं ‘स्टोरीज ऑफ मेमोरी एंड साइलेंस’ सत्र में मोना वर्मा, डॉ. आलोका दास गुप्ता नियोगी, जया श्री बैनर्जी और गुंजन कावतरा ब्लूजा ने स्मृतियों, मौन और समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
इतिहास के पन्नों से रूबरू कराती ‘हॉट ब्लड, कोल्ड प्रिंट’
फेस्टिवल का प्रमुख आकर्षण ‘इन हॉट ब्लड, कोल्ड प्रिंट’ सत्र रहा, जिसमें चर्चित लेखिका और कॉलमिस्ट बाची करकारिया तथा डॉ. रूबी गुप्ता ने भाग लिया। बाची करकारिया ने युद्धों के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करते हुए कहा कि विभिन्न देशों के बीच हुए युद्धों ने कई सामाजिक आंदोलनों और परिस्थितियों को जन्म दिया तथा व्यापार पर भी असर डाला। उन्होंने सीपी कृष्णन नायर के लेखन का उल्लेख करते हुए इतिहास को साहित्य के माध्यम से देखने की जरूरत पर बात रखी।
‘साहित्य जोड़ता है, दूरी मिटाता है’
उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि प्रेम रंजन अनिमेष ने कहा कि साहित्य ऐसा माध्यम है जो लोगों को साथ लेकर चलता है और उन्हें जोड़ता है। साहित्य और कला ने समाज में दूरी पैदा करने वाली खाइयों को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को आगे बढ़ाने में साहित्य की भूमिका रेखांकित की और संस्कृत के साहित्यिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने हरिवंश राय बच्चन की ‘मधुशाला’ का स्मरण करते हुए साहित्य में संवेदना और मधुरता की बात कही। विशिष्ट अतिथि दृष्टि आई इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. गौरव लूथरा ने आयोजन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि साहित्य में समाज को एकता के सूत्र में पिरोने की शक्ति है।
फेस्टिवल में बाची करकारिया, अशोक कुमार, डॉ. शालिनी मलिक, तरुण महर्षि, समृद्धि गुलाटी और डॉ. आलोका दास गुप्ता नियोगी समेत कई चर्चित लेखक और साहित्यिक हस्तियां शामिल हुईं। आयोजकों के अनुसार फेस्टिवल का उद्देश्य साहित्य और कला को प्रोत्साहित करने के साथ विभिन्न समकालीन मुद्दों पर सार्थक संवाद के लिए मंच उपलब्ध कराना है।