देहरादून। उत्तराखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने सोमवार को अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर राजधानी में जोरदार प्रदर्शन किया। टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता समाप्त करने, पुरानी पेंशन बहाल करने और गोल्डन कार्ड योजना की खामियों को दूर करने की मांग को लेकर शिक्षकों ने सचिवालय कूच किया तथा सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई।
परेड ग्राउंड में एकत्रित हुए प्रदेशभर के शिक्षकों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और जुलूस की शक्ल में सचिवालय की ओर बढ़े। सचिवालय से पहले पुलिस द्वारा लगाई गई बैरिकेडिंग के चलते प्रदर्शनकारियों को रोक दिया गया। इसके बाद शिक्षकों ने मौके पर ही धरना देकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन जारी रखा। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों ने तत्कालीन नियमों के अनुरूप सभी आवश्यक योग्यताएं और चयन प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद सेवा प्राप्त की थी। ऐसे में वर्षों की सेवा के बाद उन्हें टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए बाध्य करना न्यायसंगत नहीं है। उनका कहना था कि यह व्यवस्था शिक्षकों के अनुभव और कार्यकुशलता की उपेक्षा करती है। शिक्षक नेताओं ने सरकार से मांग की कि पुराने शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी जाए तथा शिक्षा विभाग से जुड़े अन्य लंबित मामलों का भी शीघ्र निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। प्रदर्शन के उपरांत शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों में कार्यक्रम संयोजक और जिला अध्यक्ष देहरादून धर्मेंद्र सिंह रावत प्रांतीय तदर्थ समिति के सदस्य दिगंबर नेगी, किशोर जोशी, मनोज जुगरान, मनोज तिवारी समेत सभी जनपद के जिला अध्यक्ष, मंत्री, कोषाध्यक्ष, जनपद देहरादून के विकासखंड रायपुर के अध्यक्ष अरविन्द सोलंकी, मंत्री बिनोद असवाल, कोषाध्यक्ष प्रशांत सकलानी, प्रचार मंत्री सुनीता रावत, भारती क्षेत्री, राजेश्वरी थपलियाल, रविन्द्र नाथ उपाध्याय विकास नगर की अध्यक्ष मधु पटवाल, मंत्री कमल सुयाल, कालसी के अध्यक्ष पीतांबर तोमर, डोईवाला के अध्यक्ष नरेंद्र सागर, मंत्री सिद्धार्थ शर्मा समेत अनेक लोग मौजूद थे